विभिन्न राज्यस्तरीय आयोग एवं निकाय
मध्य प्रदेश में सुशासन, प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता, सामाजिक न्याय एवं आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न राज्यस्तरीय आयोगों और निकायों का गठन किया गया है। ये संस्थाएँ संविधान, विधायी प्रावधानों एवं राज्य सरकार की नीतियों के अनुरूप कार्य करती हैं।
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग
प्रदेश में निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, संविधान के अनुच्छेद 243 (ट-3) के तहत 1 फरवरी, 1994 को मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया गया। यह आयोग स्थानीय निकाय चुनावों के सुचारू संचालन और निष्पक्षता की जिम्मेदारी निभाता है। आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, जिससे इसकी स्वायत्तता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग: विशिष्ट तथ्य
- भारत का पहला राज्य - मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग गठित करने वाला देश का प्रथम राज्य है।
- प्रथम चुनाव अधिसूचना - आयोग द्वारा पंचायत चुनाव संबंधी पहली अधिसूचना 15 अप्रैल, 1994 को जारी की गई थी।
- प्रथम अध्यक्ष - आयोग के पहले अध्यक्ष श्री एन. बी. लोहानी थे।
वर्तमान नेतृत्व -
- अध्यक्ष: श्री बसंत प्रताप सिंह
- सचिव: श्री दुर्ग विजय सिंह
मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग
- गठन - मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग का गठन 13 सितंबर, 1995 को मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 41(1) के तहत राज्य सरकार द्वारा किया गया।
- नियुक्ति प्रक्रिया - आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- वर्तमान अध्यक्ष - न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन वर्तमान में आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता
संवैधानिक प्रावधान - राज्य स्तर पर महाधिवक्ता (Advocate General) का प्रावधान अनुच्छेद-165 के तहत किया गया है, जो केंद्र स्तर पर भारत के महान्यायवादी (Attorney General) के समकक्ष होता है।
नियुक्ति एवं पदावधि -
- नियुक्ति: महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- हटाने की शक्ति: राष्ट्रपति के पास होती है।
- कार्यकाल: महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत (Governor’s Pleasure) पद पर बना रहता है, यानी उसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता।
- त्यागपत्र: वह किसी भी समय राज्यपाल को त्यागपत्र देकर अपना पद छोड़ सकता है।
विधानसभा में भूमिका -
अनुच्छेद-177 के तहत, महाधिवक्ता विधानसभा का सदस्य नहीं होता।
हालांकि, वह विधानसभा की बैठकों में भाग लेकर विचार-विमर्श कर सकता है, लेकिन मतदान करने का अधिकार नहीं रखता।
इतिहास एवं वर्तमान स्थिति -
- मध्य प्रदेश के प्रथम महाधिवक्ता - श्री एम. अधिकारी।
- वर्तमान महाधिवक्ता - श्री प्रशांत सिंह।
मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग
- गठन - मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग का गठन वर्ष 1995-96 में एक अधिनियम के तहत किया गया।
- उद्देश्य - यह आयोग अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक कल्याण को सुनिश्चित करने तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए कार्य करता है।
वर्तमान अध्यक्ष -
- अनुसूचित जाति आयोग: डॉ. आनंद अहिरवार
- अनुसूचित जनजाति आयोग: श्री गजेन्द्र सिंह राजूखेडी
मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग
- गठन - मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 13 मार्च, 1993 को राज्य सरकार द्वारा किया गया।
- उद्देश्य - यह आयोग पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक विकास से संबंधित नीतियों एवं योजनाओं को संचालित करने तथा उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है।
- वर्तमान अध्यक्ष - श्री गौरी शंकर बिसेन।
12 अक्टूबर, 1982 को संचालनालय पिछड़ा वर्ग कल्याण की स्थापना की गई थी। 12 सितम्बर, 1991 को राज्य शासन द्वारा पृथक् रूप से पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का गठन किया गया।
मध्य प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग
- गठन - राज्य अल्पसंख्यक आयोग का गठन 23 अक्टूबर, 1996 को राज्य अल्पसंख्यक अधिनियम-1996 के तहत किया गया।
- उद्देश्य - यह आयोग राज्य में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा, कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी और उनके सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक उत्थान के लिए कार्य करता है।
- वर्तमान अध्यक्ष - श्री नियाज मुहम्मद खान
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड
- गठन - मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का गठन वर्ष 1996 में वक्फ अधिनियम-1995 के तहत किया गया।
- उद्देश्य - यह बोर्ड राज्य की समस्त वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, नियंत्रण एवं प्रशासन का कार्य करता है, जिससे इन संपत्तियों का उचित प्रबंधन और उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
- वर्तमान अध्यक्ष - श्री दिलीप कुमार यादव।
मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग
- गठन - राज्य सूचना आयोग का गठन 22 अगस्त, 2005 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 के तहत किया गया।
- उद्देश्य - यह आयोग सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है, जिससे नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक पारदर्शी और सहज पहुंच मिल सके।
- वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त - श्री अरविंद शुक्ला।
मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग
गठन - मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग का गठन 23 मार्च, 1999 को मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1995 की धारा 3 के तहत किया गया।
उद्देश्य - यह आयोग महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके अधिकारों की सुरक्षा तथा महिला अपराधों और अत्याचारों पर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है।
वर्तमान अध्यक्ष - श्रीमती शोभा ओझा।
मध्य प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम
- भारत में पहला राज्य - मध्य प्रदेश, वर्ष 2010 में लोक सेवा गारंटी अधिनियम पारित करने वाला भारत का प्रथम राज्य है।
- उद्देश्य - इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नागरिक सेवा प्रदाय प्रक्रिया (Citizen Service Delivery System) में सुशासन स्थापित करना और सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को सरकारी सेवाएँ समय-सीमा के भीतर मिलें।
- सेवाओं का दायरा - इस अधिनियम के तहत 30 विभागों में 302 सेवाएँ अधिसूचित की गई हैं, जिनका लाभ नागरिक निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्राप्त कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश महालेखाकार कार्यालय
- गठन एवं स्थान - मध्य प्रदेश में महालेखाकार कार्यालय की स्थापना वर्ष 1985 में की गई।
- ग्वालियर - प्रारंभ में यहाँ महालेखाकार कार्यालय स्थापित किया गया।
- भोपाल - यहाँ उप-महालेखाकार कार्यालय स्थापित किया गया।
पुनर्गठन (1 अक्टूबर, 2004)
भोपाल स्थित कार्यालय को महालेखाकार कार्यालय का दर्जा दिया गया।
ग्वालियर स्थित कार्यालय को प्रधान लेखाकार कार्यालय नाम दिया गया।
कार्य एवं उद्देश्य - यह कार्यालय राज्य एवं केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों व संगठनों की लेखा परीक्षा (Audit) और वित्तीय प्रशासन की पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
मध्य प्रदेश राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो
गठन तिथि - राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो का गठन 20 नवंबर, 1976 को पुलिस मुख्यालय, भोपाल में किया गया।
उद्देश्य -
- विशेष आर्थिक अपराधों की जाँच और नियंत्रण।
- सांप्रदायिक एवं विघटनकारी गतिविधियों पर अंकुश लगाना।
- अन्य संगठित अपराधों की गहन जाँच और अन्वेषण करना।
महत्व - यह ब्यूरो राज्य में आर्थिक अपराधों की रोकथाम और विधि-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण
- संवैधानिक प्रावधान - संविधान के अनुच्छेद-323A के तहत राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य लोक सेवाओं एवं पदों पर नियुक्तियों तथा सेवा संबंधी विवादों का समाधान करना है।
- गठन तिथि एवं मुख्यालय - वर्ष 1985 में प्रशासनिक प्राधिकरण अधिनियम-1985 के तहत जबलपुर में न्यायाधिकरण की स्थापना की गई।
- विस्तार - वर्तमान में न्यायाधिकरण की अन्य इकाइयाँ भोपाल, ग्वालियर और इंदौर में भी स्थापित की गई हैं।
- महत्व - यह न्यायाधिकरण राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं लोक सेवकों से जुड़े सेवा विवादों के त्वरित एवं निष्पक्ष निपटारे के लिए कार्य करता है।
मध्य प्रदेश लोकायुक्त
गठन प्रस्ताव - 20 जून, 1969 को नरसिंहराव दीक्षित की अध्यक्षता में लोकायुक्त स्थापना का प्रस्ताव रखा गया।
संवैधानिक प्रावधान - वर्ष 1981 में लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त की स्थापना का प्रावधान किया गया।
उद्देश्य -
- राजनीतिक एवं प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर रोक लगाना।
- पद के दुरुपयोग की जाँच एवं कार्रवाई सुनिश्चित करना।
- जन समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए प्रभावी कदम उठाना।
मध्य प्रदेश लोकायुक्त: विशिष्ट तथ्य
- प्रथम लोकायुक्त - श्री पी. वी. दीक्षित।
- प्रथम उप-लोकायुक्त - श्री आर. जे. भावे।
- वर्तमान लोकायुक्त - श्री नरेश कुमार गुप्ता।
- वर्तमान उप-लोकायुक्त - श्री यू. सी. महेश्वरी एवं श्री एस. के. पालो।
मध्य प्रदेश राज्य सतर्कता आयोग
गठन तिथि - मध्य प्रदेश राज्य सतर्कता आयोग का गठन 1 मार्च, 1964 को किया गया।
संरचना -
- मुख्य सतर्कता आयुक्त।
- उप सतर्कता आयुक्त।
- संभाग एवं जिला स्तर पर भी सतर्कता अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है।
उद्देश्य -
- भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की रोकथाम।
- सरकारी विभागों और प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की जाँच एवं कार्रवाई करना।
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC)
गठन - मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग का गठन राज्य पुनर्गठन आयोग की धारा 118 (3) के तहत 27 अक्टूबर, 1956 को किया गया।
संरचना -
अध्यक्ष एवं सदस्य - राज्यपाल द्वारा राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर नियुक्त किए जाते हैं।
मुख्यालय - आयोग का कार्यालय इंदौर में स्थित है।
विशिष्ट तथ्य
प्रथम परीक्षा आयोजन - वर्ष 1958 में आयोग द्वारा पहली भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी।
प्रथम अध्यक्ष - श्री डी. बी. रेगे (ICS)।
वर्तमान अध्यक्ष - श्री प्रो. राजेश लाल मेहरा।
मुख्य कार्य -
राज्य प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षाओं का आयोजन।
नागरिक सेवाओं में निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करना।
राज्य सरकार को भर्ती संबंधी परामर्श देना।
आर. सी. वी. पी. नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय अकादमी
गठन एवं नाम परिवर्तन -
- 1966 - इसे लाल बहादुर शास्त्री लोक प्रशासनिक संस्थान के रूप में भोपाल में स्थापित किया गया।
- 1975 - इसका नाम बदलकर मध्य प्रदेश प्रशासनिक अकादमी रखा गया।
- 2001 - मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आर. सी. वी. पी. नरोन्हा की स्मृति में इसका नाम आर. सी. वी. पी. नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय अकादमी कर दिया गया।
उद्देश्य एवं कार्य -
राज्य प्रशासनिक सेवा एवं अन्य सरकारी सेवाओं के चयनित अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करना।
लोक प्रशासन और प्रबंधन में दक्षता बढ़ाना।
सरकारी अधिकारियों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन।
प्रशासनिक संरचना -
महानिदेशक - इस पद पर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं।
मध्य प्रदेश राज्य योजना आयोग
गठन एवं नाम परिवर्तन -
24 अक्टूबर, 1972 - इसका गठन मध्य प्रदेश राज्य योजना मंडल के रूप में किया गया।
21 सितंबर, 2007 - इसका नाम बदलकर मध्य प्रदेश राज्य योजना आयोग कर दिया गया।
संरचना -
अध्यक्ष - मुख्यमंत्री।
उपाध्यक्ष - योजना मंत्री।
पदेन सचिव - राज्य शासन के सचिव।
अन्य सदस्य -
6 सदस्य।
15 सलाहकार।
12 सहायक सलाहकार।
12 उप-सलाहकार।
वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष - श्री प्रो. सचिन चतुर्वेदी।
उद्देश्य एवं कार्य -
राज्य की आर्थिक एवं सामाजिक योजनाओं का निर्माण और नीति निर्धारण।
राज्य के संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के लिए रणनीति तैयार करना।
मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग
संवैधानिक प्रावधान -
73वें और 74वें संविधान संशोधन (अनुच्छेद 243(झ)1) के तहत प्रत्येक 5 वर्ष में पंचायतों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करने के लिए राज्य वित्त आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया।
गठन एवं इतिहास -
प्रथम राज्य वित्त आयोग - 14 जून, 1994 को गठित।
प्रथम अध्यक्ष - श्री सवाई सिंह।
वर्तमान अध्यक्ष - श्री हिम्मत कोठारी।
उद्देश्य एवं कार्य -
राज्य की पंचायतों एवं शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना।
राज्य सरकार को वित्तीय आवंटन से संबंधित सिफारिशें देना।
स्थानीय निकायों की वित्तीय सुदृढ़ता एवं संसाधन वितरण की योजना तैयार करना।
मध्य प्रदेश जिला योजना समिति
संवैधानिक प्रावधान -
74वें संविधान संशोधन (1992) के तहत अनुच्छेद 243(ZD) में जिला योजना समिति के गठन का प्रावधान किया गया।
इस समिति का उद्देश्य जिलों के समग्र विकास के लिए प्रभावी योजना निर्माण और क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
संरचना -
समिति में पंचायत राज संस्थाओं एवं जिले के नगरीय निकायों के 80% सदस्य शामिल होते हैं।
अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं विशेषज्ञ सदस्य भी समिति का हिस्सा होते हैं।
सशक्तिकरण एवं विधिक आधार -
वर्ष 1995 में जिला योजना समिति अधिनियम पारित किया गया, जिससे इन समितियों को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाया जा सके।
मुख्य कार्य -
जिले के विकास कार्यों की योजना तैयार करना और उसके क्रियान्वयन की निगरानी करना।
राज्य सरकार को जिला स्तर पर आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश करना।
स्थानीय निकायों के विकास कार्यों का समन्वय एवं समीक्षा करना।
संजय गांधी युवा नेतृत्व एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान
- गठन तिथि - 14 दिसंबर, 1980।
- स्थापना स्थान - पचमढ़ी, जिला होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम), मध्य प्रदेश।
- संस्थापक विभाग - मध्य प्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग।
उद्देश्य एवं कार्य -
- ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवाओं को नेतृत्व और विकास से संबंधित प्रशिक्षण देना।
- ग्राम स्तरीय संस्थाओं में कार्यरत जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का प्रशिक्षण देना।
- स्थानीय स्तर पर कौशल विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना।
- ग्राम पंचायतों और ग्रामीण संगठनों की क्षमता निर्माण में सहयोग करना।
3. राजनैतिक व्यवस्था
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