वैदिक सभ्यता (मध्य प्रदेश)

वैदिक सभ्यता और मध्य प्रदेश  

वैदिक सभ्यता का प्रभाव मुख्य रूप से उत्तर भारत में दिखाई देता है, लेकिन प्रारंभिक वैदिक आर्यों को मध्य प्रदेश के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, महर्षि अगस्त्य के नेतृत्व में यादवों का एक समूह नर्मदा घाटी में आकर बस गया था, और यहीं से इस क्षेत्र में आर्यों के प्रवेश की शुरुआत हुई।
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उत्तर वैदिक संहिताओं, ब्राह्मण ग्रंथों और आरण्यकों में मध्य प्रदेश से जुड़े कई संदर्भ मिलते हैं। कौषीतकी उपनिषद् में अप्रत्यक्ष रूप से विंध्य पर्वत का उल्लेख किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र का महत्व उस काल में भी था। शतपथ ब्राह्मण और वैदिकोत्तर साहित्य में "रेवोत्तरम्" नामक स्थान का उल्लेख मिलता है, जिसे प्रसिद्ध इतिहासकार वेबर ने रेवा नदी (नर्मदा) के रूप में पहचाना है।
  • उत्तर वैदिक काल में मध्य प्रदेश के घने जंगलों में कुछ अनार्य जातियां निवास करती थीं। ऐतरेय ब्राह्मण में निषाद जाति का उल्लेख मिलता है, जो इस क्षेत्र के प्रमुख निवासियों में से एक थी। यह दर्शाता है कि वैदिक काल में भी मध्य प्रदेश का भू-भाग विविध संस्कृतियों और समुदायों का केंद्र था।
वैदिक सभ्यता के विस्तार और मध्य प्रदेश से जुड़े इन ऐतिहासिक तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र भारत के प्राचीन सांस्कृतिक और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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