स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य गतिविधियाँ (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास वीरता, बलिदान और जनांदोलनों से भरा हुआ है। इस संघर्ष में प्रदेश के विभिन्न जिलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रतलाम जिले में स्वतंत्रता आंदोलन
रतलाम जिले में राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार स्वामी ज्ञानानंद थे। उनकी प्रेरणा से वर्ष 1920 में रतलाम कांग्रेस समिति की स्थापना हुई और मोहम्मद उमराखान इसके प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1931 में महिला सेवादल की स्थापना की गई, जिसने महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
भोपाल रियासत और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
वर्ष 1922 में भोपाल रियासत के सीहोर कोतवाली के सामने स्वतंत्रता संग्राम के तहत विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। यह विरोध प्रदर्शन विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था।
झाबुआ में प्रजा मंडल आंदोलन
वर्ष 1934 में झाबुआ में प्रजा मंडल के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक और आर्थिक सुधारों के लिए आंदोलन चलाए गए। इनमें शराबबंदी, हरिजन उद्धार, और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार जैसे अभियान शामिल थे। ये आंदोलन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन-जागृति का प्रतीक बने।
भोपाल रियासत में अन्जुमन-खुद्दाम-ए-वतन की स्थापना
भोपाल रियासत में स्वतंत्रता संग्राम को और अधिक सशक्त करने के लिए वर्ष 1934 में मौलाना तर्जी मशरिकी खान और खान शाकिर अली खाँ द्वारा अन्जुमन-खुद्दाम-ए-वतन संगठन की स्थापना की गई। इस संगठन ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनजागृति और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भोपाल राज्य हिंदू सभा का गठन
वर्ष 1937 में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मास्टर लाल सिंह ने पं. चतुर नारायण मालवीय, डॉ. जमुना प्रसाद मुखरैया, लक्ष्मी नारायण सिंहल, और पंडित उद्धवदास मेहता के सहयोग से भोपाल राज्य हिंदू सभा का गठन किया। इसी वर्ष भोपाल राज्य हिंदू सभा के अधिवेशन में मास्टर लाल सिंह, पं. उद्धवदास मेहता और डॉ. जमुना प्रसाद मुखरैया को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया, जिससे स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला और भी प्रज्वलित हुई।
रतलाम में प्रजा परिषद का गठन
वर्ष 1935 में रतलाम में प्रजा परिषद (प्रजा मंडल) की स्थापना की गई। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य किसानों और मजदूरों को संगठित करना और उन्हें ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित करना था।
भोपाल राज्य प्रजामंडल की स्थापना
अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू की प्रेरणा से वर्ष 1938 में भोपाल राज्य प्रजामंडल की स्थापना हुई। इस संगठन ने रियासतों में जन आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को नई दिशा दी।
मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रतलाम, भोपाल और झाबुआ जैसे क्षेत्रों ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन चलाए, बल्कि जनजागृति में भी योगदान दिया। इन आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को और अधिक सशक्त बनाया और भारतीय स्वतंत्रता के मार्ग को प्रशस्त किया।
2. मध्य प्रदेश का इतिहास
- पुरापाषाण काल
- मध्यपाषाण काल
- नवपाषाण काल
- ताम्रपाषाण काल
- मालवा की ताम्रपाषाण संस्कृति
- ऐतिहासिक काल (लौह युग)
- वैदिक सभ्यता
- पौराणिक कालखण्ड
- महाजनपद काल
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- शुंग वंश
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- हिन्द-यवन
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- परिव्राजक और उच्चकल्प
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- कलचुरि राजवंश
- चंदेल
- राष्ट्रकूट
- गुर्जर-प्रतिहार वंश
- मालवा का परमार वंश
- दिल्ली सल्तनत
- मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना
- निमाड़ में फारूकी शासन
- मुगल काल
- गढ़ा का गोंड वंश
- तोमर वंश
- बुंदेला वंश
- बघेलखण्ड राज्य
- मध्य प्रदेश में आधुनिक काल का इतिहास
- होल्कर रियासत
- सिंधिया वंश
- भोपाल रियासत
- भोपाल की बेगमें
- मध्य प्रदेश में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रमुख विद्रोह
- मध्य प्रदेश में 1857 की क्रांति
- राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश की भूमिका
- झण्डा सत्याग्रह
- जंगल सत्याग्रह
- मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह
- चरणपादुका नरसंहार
- पंजाब मेल हत्याकांड
- सोहाबल का नरसंहार
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य गतिविधियाँ
- भोपाल राज्य का स्वतंत्रता संघर्ष
- भोपाल का जलियाँवाला काण्ड
- रीवा का चावल आंदोलन
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