सोहावल का नरसंहार (मध्य प्रदेश)

सोहावल का नरसंहार (मध्य प्रदेश)

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश का योगदान अविस्मरणीय रहा है। इसी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण घटना "सोहावल का नरसंहार" के रूप में जानी जाती है, जिसने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को उजागर किया। यह हृदयविदारक घटना सतना जिले के बिरसिंहपुर के समीप हिनौता गाँव में 10 जुलाई, 1938 को घटित हुई।
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घटना का पृष्ठभूमि

सोहावल रियासत में ब्रिटिश शासन के दमनकारी नीतियों के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी सुलग रही थी। इस आंदोलन के नेतृत्व में पगार खुर्द निवासी लाल बुद्ध प्रताप सिंह सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाने के उद्देश्य से उन्होंने हिनौता गाँव में एक आम सभा आयोजित की। इस सभा में बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानी और स्थानीय ग्रामीण शामिल होने वाले थे।

माजन गोलीकांड

जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाल बुद्ध प्रताप सिंह, रामाश्रय गौतम और मंधीर पांडे इस सभा में शामिल होने के लिए जा रहे थे, तब ब्रिटिश सैनिकों ने माजन गाँव के समीप उन्हें रोककर निर्ममता से गोली मार दी। इस वीभत्स हत्याकांड में तीनों वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह घटना इतिहास में "माजन गोलीकांड" के नाम से भी जानी जाती है।

महत्व और प्रभाव

सोहावल नरसंहार ने ब्रिटिश शासन के दमनकारी स्वरूप को उजागर किया और स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा प्रदान की। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया, और स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला और अधिक प्रज्वलित हो उठी। यह शहादत स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का प्रतीक बन गई और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देती रही।

त्रिपुरी अधिवेशन
जबलपुर में 29 जनवरी, 1939 को कांग्रेस का 52वाँ अधिवेशन सम्पन्न हुआ था। इस अधिवेशन में सुभाषचन्द्र बोस ने 203 मतों से पट्टाभि सीतारमैया को पराजित किया और कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए।

"सोहावल का नरसंहार" भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह घटना न केवल ब्रिटिश हुकूमत के अमानवीय अत्याचारों को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि स्वतंत्रता की राह में वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
इन शहीदों के बलिदान को स्मरण करते हुए हमें अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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