शुंग वंश : मध्य प्रदेश में शासन और विरासत

शुंग वंश : मध्य प्रदेश में शासन और विरासत

इस लेख में शुंग वंश के शासन, उनकी सांस्कृतिक विरासत और मध्य प्रदेश में उनके प्रभाव को विस्तार से बताया गया है। मौर्य वंश के पतन के बाद शुंग वंश ने विदिशा और उज्जैन सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर शासन किया। कालिदास के ग्रंथ मालविकाग्निमित्रम् में युवराज अग्निमित्र के विदिशा शासन का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा, ग्रीक राजदूत हेलियोडोरस द्वारा विदिशा में बनाए गए गरुड़ स्तंभ और शुंगकाल में किए गए बौद्ध स्थापत्य निर्माण जैसे भरहुत स्तूप और साँची स्तूप के विस्तार पर भी प्रकाश डाला गया है। यह लेख शुंग वंश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद करेगा।
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मौर्य वंश के पतन के बाद शुंग वंश ने मध्य प्रदेश के विस्तृत भूभाग पर शासन किया। इस वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने की थी। संस्कृत नाटक "मालविकाग्निमित्रम्" (कालिदास) के अनुसार, युवराज अग्निमित्र अपने पिता पुष्यमित्र शुंग के प्रतिनिधि के रूप में विदिशा में शासन करता था।

उज्जैन से संबंध और राजनयिक संपर्क

शुंग वंश का गहरा संबंध उज्जैन से था। इस वंश के आठवें शासक भागवत् (काशीपुत्र भागभद्र) के समय ग्रीक राजा एंटियलकीड्स का राजदूत हेलियोडोरस विदिशा आया था।
उसने भगवान विष्णु को समर्पित गरुड़ स्तंभ का निर्माण कराया, जिसे आज "खामबाबा" के नाम से जाना जाता है। यह स्तंभ शुंग वंश और विदेशी शासकों के बीच सांस्कृतिक व धार्मिक संबंधों को दर्शाता है।

बौद्ध स्थापत्य और शुंगकालीन निर्माण

शुंग वंश के शासनकाल में कई महत्वपूर्ण बौद्ध निर्माण हुए:
  • भरहुत स्तूप (सतना से 14 किमी दूर, उचेहरा) का पुनर्निर्माण करवाया गया।
  • साँची स्तूप (अशोककालीन) की चारदीवारी और प्रवेश द्वार शुंग काल में जोड़े गए।
शुंग वंश ने मध्य प्रदेश में कला, संस्कृति और धार्मिक संरचनाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसका प्रभाव आज भी देखा जा सकता है।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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