सातवाहन वंश (मध्य प्रदेश)
यह लेख मध्य प्रदेश में सातवाहन वंश के ऐतिहासिक प्रभाव को विस्तार से प्रस्तुत करता है। इसमें सातवाहन शासकों के विजय अभियानों, प्रशासनिक नियंत्रण, सिक्कों के प्रमाण और सांस्कृतिक योगदान का वर्णन किया गया है। यह लेख पुरातात्विक स्रोतों के आधार पर सातवाहन वंश की विरासत को समझने में सहायक होगा।
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक परिदृश्य में सातवाहन वंश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस वंश की स्थापना सिमुक ने की थी, जिसने विदिशा के शासक कण्व को पराजित कर अपना आधिपत्य स्थापित किया। सातवाहन शासकों ने मालवा और नर्मदा घाटी के क्षेत्रों पर भी शासन किया, जिससे यह वंश मध्य प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
सातवाहन शासकों का मध्य प्रदेश पर नियंत्रण
सातवाहन वंश के प्रभावशाली शासकों में सिमुक के प्रपौत्र शातकर्णी प्रथम ने पश्चिमी मालवा तथा अनूप (नर्मदा घाटी) तक अपना अधिकार स्थापित किया। गौतमीपुत्र शातकर्णी की माता, गौतमी बलश्री, के पूना और नासिक के शिलालेखों में उल्लेख मिलता है कि उन्होंने अनूप (निमाड़), अकार (पूर्वी मालवा) और अवंति (पश्चिम मालवा) पर विजय प्राप्त की थी। इसके अतिरिक्त, साँची स्तूप के दक्षिणी तोरण (द्वार) के शिलालेख में भी गौतमीपुत्र शातकर्णी का उल्लेख किया गया है, जो इस क्षेत्र में उनके शासन को प्रमाणित करता है।
सातवाहन शासकों के सिक्के और उनके प्रमाण
मध्य प्रदेश के विभिन्न स्थानों से सातवाहन शासकों के सिक्के प्राप्त हुए हैं, जो इस वंश के प्रभाव को दर्शाते हैं। राजा सिरिसात के नामांकित सिक्के उज्जैन, देवास, होशंगाबाद (जमुनिया), जबलपुर (तेवर, भेड़ाघाट, त्रिपुरी) में पाए गए हैं। इसके अलावा, वशिष्ठी पुत्र पुलुमावी (130 ई. से 154 ई.) के सिक्के भेलसा (विदिशा) और देवास से प्राप्त हुए हैं। अंतिम सातवाहन शासक यज्ञश्री शातकर्णी (165 ई. से 194 ई.) के सिक्के बेसनगर, तेवर और देवास से भी मिले हैं। इन प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि सातवाहन शासकों ने मध्य प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सत्ता स्थापित की थी।
सातवाहन वंश की विरासत
सातवाहन वंश की उपलब्धियाँ केवल सैन्य विजय तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि उन्होंने सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया। मध्य प्रदेश में प्राप्त उनके सिक्के और शिलालेख इस बात की पुष्टि करते हैं कि उन्होंने इस क्षेत्र के आर्थिक और प्रशासनिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस प्रकार, सातवाहन वंश ने मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में शासन कर इस क्षेत्र के इतिहास को समृद्ध किया और उनकी विरासत आज भी पुरातात्विक स्थलों और अभिलेखों के रूप में विद्यमान है।
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