राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश की भूमिका
मध्य प्रदेश का राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहाँ की भूमि ने कई स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया और अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं की साक्षी बनी।
प्रारंभिक राष्ट्रीय चेतना और आंदोलनों की शुरुआत
1891 में नागपुर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सातवें अधिवेशन का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता पी. आनंद चार्लू ने की। इस अधिवेशन में मध्य प्रांत एवं मालवा में गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव के आयोजन का निर्णय लिया गया, जिससे राष्ट्रीय चेतना को बल मिला।
मध्य प्रदेश के क्रांतिकारी विचारक और पत्रकारिता का योगदान
1901 में कलकत्ता अधिवेशन में मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी डॉ. हरिसिंह गौर ने न्याय विभाग और शासन विभाग को अलग करने की माँग रखी। इसके अलावा, 1904 में उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली की कड़ी आलोचना की। इस दौरान खंडवा से "सुबोध सिन्धु" और जबलपुर से "जबलपुर टाइम्स" नामक समाचार पत्रों का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने अपने समाचार पत्र "कर्मवीर" के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महत्वपूर्ण अधिवेशन और संगठन
1906 में जबलपुर में मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रांतीय अधिवेशन आयोजित किया गया, जिसमें पंडित रविशंकर शुक्ल, डॉ. राघवेन्द्र और डॉ. हरिसिंह गौर जैसे प्रमुख कांग्रेसी कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके बाद, 1907 में जबलपुर में एक क्रांतिकारी दल का गठन किया गया और 1915 में यहाँ होमरूल लीग की स्थापना की गई, जिससे स्वशासन की माँग को और अधिक बल मिला।
रौलेट एक्ट का विरोध और असहयोग आंदोलन में भूमिका
20 मार्च 1919 को खंडवा में मध्य प्रांतीय राजनैतिक परिषद की बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता दादा साहेब खापर्डे ने की। इस बैठक में रौलेट एक्ट के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद असहयोग आंदोलन के दौरान जबलपुर में भी आंदोलन तेज हुआ। विक्टोरिया टाउन हॉल (वर्तमान गांधी भवन) में सर्वप्रथम झंडा फहराया गया, जो कि दमोह निवासी श्री प्रेमचंद उस्ताद द्वारा किया गया था।
राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। यहाँ के स्वतंत्रता सेनानियों और पत्रकारों ने अपने प्रयासों से देश को आज़ादी दिलाने में योगदान दिया। चाहे वह राजनीतिक संगठन हो, पत्रकारिता का माध्यम हो, या क्रांतिकारी गतिविधियाँ, मध्य प्रदेश ने हर स्तर पर स्वतंत्रता संग्राम को मजबूती प्रदान की।
2. मध्य प्रदेश का इतिहास
- पुरापाषाण काल
- मध्यपाषाण काल
- नवपाषाण काल
- ताम्रपाषाण काल
- मालवा की ताम्रपाषाण संस्कृति
- ऐतिहासिक काल (लौह युग)
- वैदिक सभ्यता
- पौराणिक कालखण्ड
- महाजनपद काल
- मौर्य काल
- शुंग वंश
- सातवाहन वंश
- हिन्द-यवन
- शक वंश
- कुषाण वंश
- नागवंश
- आभीर वंश
- बोधि और मघ
- वाकाटक वंश
- गुप्त वंश
- औलिकर वंश
- परिव्राजक और उच्चकल्प
- पाण्डु वंश
- परवर्ती गुप्त एवं मौखरि वंश
- कलचुरि राजवंश
- चंदेल
- राष्ट्रकूट
- गुर्जर-प्रतिहार वंश
- मालवा का परमार वंश
- दिल्ली सल्तनत
- मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना
- निमाड़ में फारूकी शासन
- मुगल काल
- गढ़ा का गोंड वंश
- तोमर वंश
- बुंदेला वंश
- बघेलखण्ड राज्य
- मध्य प्रदेश में आधुनिक काल का इतिहास
- होल्कर रियासत
- सिंधिया वंश
- भोपाल रियासत
- भोपाल की बेगमें
- मध्य प्रदेश में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रमुख विद्रोह
- मध्य प्रदेश में 1857 की क्रांति
- राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश की भूमिका
- झण्डा सत्याग्रह
- जंगल सत्याग्रह
- मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह
- चरणपादुका नरसंहार
- पंजाब मेल हत्याकांड
- सोहाबल का नरसंहार
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य गतिविधियाँ
- भोपाल राज्य का स्वतंत्रता संघर्ष
- भोपाल का जलियाँवाला काण्ड
- रीवा का चावल आंदोलन
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