पंजाब मेल हत्याकांड (मध्य प्रदेश)

पंजाब मेल हत्याकांड (मध्य प्रदेश)

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे वीर घटनाएँ घटित हुईं जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को हिला कर रख दिया। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण घटना पंजाब मेल हत्याकांड थी, जो 23-24 जुलाई, 1931 को मध्य प्रदेश के खंडवा रेलवे स्टेशन पर हुई थी।
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पंजाब मेल हत्याकांड की पृष्ठभूमि

ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने विभिन्न क्रांतिकारी कदम उठाए। इसी क्रम में, वीर यशवंत सिंह (दमोह), देवनारायण तिवारी और दलपत राव ने खंडवा रेलवे स्टेशन पर ब्रिटिश अधिकारी हैक्सल पर हमला किया और उसकी हत्या कर दी।

मुकदमा और सजा

इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार ने इन क्रांतिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। 10 अगस्त, 1931 को खंडवा अदालत में इन पर मुकदमा चलाया गया। न्यायालय के फैसले के अनुसार:
  • यशवंत सिंह और देवनारायण तिवारी को 11 दिसंबर, 1931 को फाँसी की सजा दी गई।
  • दलपत राव को काला पानी (आजन्म कारावास) की सजा सुनाई गई।

क्रांतिकारियों का बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

इन वीर स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। इस घटना ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनमानस को और अधिक उद्वेलित कर दिया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब मेल हत्याकांड एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जिसने यह साबित कर दिया कि भारतीय क्रांतिकारी किसी भी हद तक जाने को तैयार थे।
पंजाब मेल हत्याकांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उन गाथाओं में से एक है, जिसने ब्रिटिश हुकूमत को यह एहसास कराया कि भारतीय स्वतंत्रता सेनानी अपने देश की आजादी के लिए किसी भी प्रकार का बलिदान देने को तैयार हैं। इस घटना ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़ा संदेश दिया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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