नवपाषाण काल (मध्य प्रदेश)
मध्यप्रदेश में कई स्थानों से नवपाषाण काल (Neolithic Age) के महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीनता को दर्शाते हैं। भोपाल, जबलपुर, रीवा और दमोह जैसे स्थानों से खोजे गए लघु पाषाण उपकरण, शैलाश्रय और मानव बस्तियों के प्रमाण यह साबित करते हैं कि यह क्षेत्र प्रारंभिक मानव सभ्यता का एक प्रमुख केंद्र रहा होगा।
इस ब्लॉग में हम आपको मध्यप्रदेश के विभिन्न स्थलों पर मिले नवपाषाण कालीन अवशेषों, उनकी विशेषताओं और उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। जानिए कैसे यह खोजें प्राचीन भारत के इतिहास और संस्कृति को उजागर करती हैं!
भोपाल के नवपाषाण कालीन साक्ष्य
राजधानी भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्र नवपाषाण काल की पुरातात्विक खोजों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
- मनुआभान टेकरी, नेवरी गुफा और श्यामला पहाड़ी के शैलाश्रयों से खाँचेदार क्रोड और लघु पाषाण उपकरण मिले हैं, जो इस क्षेत्र में मानव निवास की पुष्टि करते हैं।
- बैरागढ़ के पास स्थित शैलाश्रयों में अर्द्धचन्द्राकार और समलम्ब आकार के नवपाषाण कालीन उपकरण प्राप्त हुए हैं, जो इस काल के मानवों की दैनिक जीवनशैली और तकनीकी कौशल का संकेत देते हैं।
जबलपुर के नवपाषाण कालीन अवशेष
जबलपुर जिले में स्थित नर्मदा नदी के किनारे कई स्थानों से नवपाषाण काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो यहाँ की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं।
- भेड़ाघाट, तिलवारा घाट और लम्हेटाघाट में नवपाषाण काल की मानव बस्तियों के प्रमाण मिले हैं।
- यह क्षेत्र उन शुरुआती मानवों का निवास स्थान रहा होगा, जो नर्मदा नदी के आसपास बसकर शिकार, कृषि और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों में संलग्न थे।
रीवा संभाग के नवपाषाण साक्ष्य
रीवा संभाग के अनेक स्थानों से नवपाषाण काल से संबंधित महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं।
- सोन नदी की तलहटी, ईटार पहाड़, बनास और मोहन नदी घाटी के मध्य विभिन्न नवपाषाण कालीन उपकरण खोजे गए हैं, जो दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र भी प्राचीन मानव गतिविधियों का केंद्र रहा होगा।
- रीवा जिले में चचाई जलप्रपात और गोविन्दगढ़ तालाब के निकट लघु पाषाण कालीन उपकरण मिले हैं, जो इस काल के औजारों की विविधता को दर्शाते हैं।
दमोह जिले के नवपाषाण कालीन प्रमाण
दमोह जिले में भी नवपाषाण काल के साक्ष्य खोजे गए हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं।
- संग्रामपुर घाटी (दमोह के दक्षिण-पूर्व) से वर्ष 1866 में नवपाषाण कालीन अवशेष प्राप्त हुए थे।
- इन अवशेषों से यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में भी प्राचीन मानव सभ्यता विकसित हुई थी।
नवपाषाण काल के साक्ष्यों का महत्व
मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मिले नवपाषाण कालीन अवशेष हमें यह संकेत देते हैं कि यह क्षेत्र प्राचीन मानव सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इन पुरातात्विक खोजों से हमें उस काल की जीवनशैली, तकनीकी प्रगति और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की जानकारी मिलती है।
- मध्यप्रदेश के नवपाषाण कालीन साक्ष्य भारतीय इतिहास और मानव विकास की गाथा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन खोजों से यह प्रमाणित होता है कि यह क्षेत्र मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास का गवाह रहा है और यहाँ रहने वाले लोग प्रकृति के अनुरूप जीवन व्यतीत करते थे।
मध्यप्रदेश में नवपाषाण काल के प्रमाणों की खोज से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरणों का प्रमुख केंद्र था।
भोपाल, जबलपुर, रीवा और दमोह जैसे क्षेत्रों में पाए गए पुरातात्विक अवशेष हमें प्राचीन मानव के जीवन, उसकी तकनीकी प्रगति और निवास स्थलों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं। यह साक्ष्य हमारे इतिहास और संस्कृति की गहरी समझ विकसित करने में सहायक होते हैं।
2. मध्य प्रदेश का इतिहास
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