मौर्य काल (मध्य प्रदेश) : एक ऐतिहासिक अवलोकन

मौर्य काल और मध्य प्रदेश: एक ऐतिहासिक अवलोकन

मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण कालखंड था, जिसके अंतर्गत संपूर्ण भारत के साथ-साथ मध्य प्रदेश भी शामिल था। मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी, और इस साम्राज्य की शक्ति को उसके पोते सम्राट अशोक ने चरम पर पहुँचाया। मध्य प्रदेश में मौर्य शासन के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटीं, जिनके प्रमाण आज भी विभिन्न अभिलेखों और स्मारकों के रूप में मौजूद हैं।
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इस लेख में मौर्य साम्राज्य के विस्तार, प्रशासन, प्रमुख शासकों और मध्य प्रदेश में उनके प्रभाव का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें अशोक के शासनकाल, उनके अभिलेखों और बौद्ध धर्म के प्रसार से जुड़े ऐतिहासिक प्रमाणों का उल्लेख किया गया है। साथ ही, साँची, भरहुत, देउरकोठार जैसे मौर्यकालीन बौद्ध स्तूपों और अन्य महत्वपूर्ण स्मारकों की जानकारी भी दी गई है। यह लेख मौर्यकालीन मध्य प्रदेश के समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।

मध्य प्रदेश में मौर्य शासन

मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित थी। रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य ने गुजरात (सौराष्ट्र) क्षेत्र में अपने गवर्नर पुरुगुप्त को नियुक्त किया था। उनके शासन में सौराष्ट्र, मालवा और अवंति क्षेत्र भी शामिल थे। यह प्रमाणित करता है कि मध्य प्रदेश का एक बड़ा भाग मौर्य साम्राज्य के अधीन था।

अशोक का मध्य प्रदेश से संबंध

तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में, बिंदुसार के शासनकाल के दौरान अशोक 11 वर्षों तक अवंति के प्रांतपाल के रूप में कार्यरत रहा। इस दौरान उसने उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) को अपनी राजधानी बनाया। अशोक के शासन की जानकारी हमें मध्य प्रदेश में स्थित गुर्जरा और रूपनाथ के लघु शिलालेखों से मिलती है।
गुर्जरा लघु शिलालेख में अशोक को "अशोक", "देवनामप्रिय" और "प्रियदर्शी" नामों से उल्लिखित किया गया है। इसके अलावा, महावंश के प्रमाणों के अनुसार, अशोक की भेंट विदिशा (वर्तमान बेसनगर) में एक शक वंश के व्यापारी की पुत्री देवी (कुमार देवी) से हुई थी। बाद में, अशोक ने कुमार देवी से विवाह किया। यह भी उल्लेखनीय है कि गुप्त काल तक साँची को "काकनादबोट" के नाम से जाना जाता था। इसी स्थान पर अशोक का प्रसिद्ध संघ-भेद अभिलेख भी मिला है, जिसमें उसने संघभेद को रोकने के लिए एक शाही आदेश जारी किया था।

मौर्यकालीन स्मारक और स्तूप

मौर्य काल में बौद्ध धर्म को समर्पित कई महत्वपूर्ण स्मारकों का निर्माण हुआ। इनमें प्रमुख रूप से विभिन्न स्तूप शामिल हैं, जो आज भी मध्य प्रदेश में देखे जा सकते हैं।

1. साँची का स्तूप
साँची का स्तूप, जिसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक द्वारा निर्मित किया गया था, विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। मूल रूप से यह स्तूप ईंटों से बना था, जिसे बाद में पत्थरों से पुनर्निर्मित किया गया। वर्ष 1818 में जनरल टेलर ने इस स्तूप की खोज की थी। यह स्तूप बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना।

2. तुमैन के स्तूप
तुमैन (जिला अशोक नगर) एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर स्थित था, जो विदिशा और मथुरा को जोड़ता था। यहाँ पर तीन मौर्यकालीन बौद्ध स्तूपों की स्थापना की गई थी। ये स्तूप प्राचीन भारत में व्यापार और धर्म के घनिष्ठ संबंधों को दर्शाते हैं।

3. उज्जैन का बौद्ध महास्तूप
उज्जैन, जो मौर्य काल में एक प्रमुख शहर था, अशोक द्वारा निर्मित विशाल बौद्ध महास्तूप के लिए प्रसिद्ध था। यह स्तूप उनकी पत्नी कुमार देवी के सम्मान में बनाया गया था। इसके अवशेष वर्तमान में वैश्य टेकरी (कानीपुरा) नामक टीले के रूप में देखे जा सकते हैं।

4. कसरावद के स्तूप
मध्य प्रदेश के खरगौन जिले में स्थित कसरावद के इतबर्डी टीले से 11 मौर्यकालीन स्तूपों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह क्षेत्र मौर्य काल में बौद्ध धर्म के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

5. देउरकोठार के स्तूप
रीवा जिले के देउरकोठार में भी मौर्यकालीन बौद्ध स्तूपों के अवशेष पाए गए हैं। यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

6. पानगुराड़िया का स्तूप
सीहोर जिले के पानगुराड़िया क्षेत्र में एक मौर्यकालीन स्तूप मिला है, जिसमें प्रदक्षिणापथ (घूमने का मार्ग) भी बना हुआ है। यह स्तूप उस काल में बौद्ध धर्म के प्रति जनसमूह की आस्था को दर्शाता है।

7. भरहुत का स्तूप
भरहुत स्तूप, जो सतना जिले में स्थित है, मौर्यकालीन कला और संस्कृति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी खोज 1873 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी। यह स्तूप अपनी विस्तृत नक्काशीदार रेलिंग और बौद्ध धर्म से जुड़ी कहानियों को दर्शाने वाली मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।

मौर्य काल का सांस्कृतिक प्रभाव

मौर्य साम्राज्य के दौरान मध्य प्रदेश में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रचार हुआ। इस काल में अनेक स्तूप, विहार और शिलालेख स्थापित किए गए, जो आज भी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित हैं।
  1. बौद्ध धर्म का प्रसार:- सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाने के बाद इसे पूरे भारत में फैलाया। मध्य प्रदेश में इसके प्रमाण रूपनाथ, साँची, भरहुत और देउरकोठार के अभिलेखों और स्तूपों से मिलते हैं।
  2. शासन व्यवस्था:- मौर्य प्रशासन अत्यंत संगठित था। अशोक के विभिन्न अभिलेख यह दर्शाते हैं कि वह एक न्यायप्रिय शासक था, जिसने अपने प्रशासन के माध्यम से लोगों के कल्याण हेतु अनेक नीतियाँ लागू कीं।
  3. व्यापार और अर्थव्यवस्था:- मौर्य काल में मध्य प्रदेश का उज्जैन, विदिशा और मथुरा जैसे नगर व्यापार के प्रमुख केंद्र थे। यहाँ से विभिन्न वस्तुओं का निर्यात और आयात किया जाता था।
मौर्य काल ने मध्य प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सम्राट अशोक द्वारा निर्मित स्तूप और शिलालेख इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म के प्रचार और प्रशासनिक संरचना को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं। आज भी मध्य प्रदेश में स्थित ये प्राचीन धरोहरें हमें मौर्य साम्राज्य की समृद्धि और इसके ऐतिहासिक महत्व की याद दिलाती हैं।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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