शक वंश और कार्दमक वंश (मध्य प्रदेश)

शक वंश और कार्दमक वंश (मध्य प्रदेश)

इस लेख में मध्य प्रदेश में शक वंश, विशेष रूप से कार्दमक वंश के चष्टन और रुद्रदामन के शासन, मालवा और उज्जैन पर उनके आधिपत्य, सैन्य अभियानों, सिक्कों और अभिलेखों से प्राप्त ऐतिहासिक प्रमाणों का वर्णन किया गया है।
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मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में शक वंश और कार्दमक वंश का शासन एक महत्वपूर्ण कालखंड माना जाता है। शक शासकों, विशेषकर कार्दमक वंश के चष्टन और उनके पौत्र रुद्रदामन के शासनकाल में पश्चिमी क्षत्रपों की शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। उन्होंने अनेक क्षेत्रों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया और समकालीन राजवंशों से संघर्ष किया।  

चष्टन और कार्दमक वंश की स्थापना  

कार्दमक वंश के संस्थापक चष्टन ने काठियावाड़ और उज्जैन में अपना प्रभाव स्थापित किया। उनकी राजधानी उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) थी, जो उस समय एक प्रमुख प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र था। चष्टन के शासन का प्रमाण उज्जैन और शिवपुरी से प्राप्त उनके सिक्कों से मिलता है। प्राचीन यूनानी विद्वान टॉलमी (Ptolemy) ने भी अपने विवरणों में चष्टन को उज्जैन का राजा बताया है।  

रुद्रदामन का शासन और मालवा पर अधिकार  

चष्टन के बाद उनके पौत्र रुद्रदामन ने सत्ता संभाली और अपने सैन्य अभियानों के कारण प्रसिद्ध हुए। जूनागढ़ शिलालेख के अनुसार, रुद्रदामन ने गौतमीपुत्र शातकर्णी को दो बार परास्त किया और कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। इन विजय अभियानों में पूर्वी और पश्चिमी मालवा तथा महिष्मती (वर्तमान महेश्वर) के समीपवर्ती क्षेत्र शामिल थे।  

शक क्षत्रपों के पुरातात्विक प्रमाण  

शक वंश की उपस्थिति के प्रमाण शिवपुरी, साँची, सिवनी और बेसनगर से प्राप्त सिक्कों से मिलते हैं। इसके अलावा, उज्जैन से शक क्षत्रपों के अभिलेख, और खेरखेड़ी (शाजापुर) से महाक्षत्रप रुद्रसिंह का शिलालेख भी मिले हैं। श्रीधरवर्मन् के अभिलेख एरण और साँची के पास कानाखेड़ा से प्राप्त हुए हैं, जो इस वंश के विस्तार को दर्शाते हैं।
शक वंश, विशेष रूप से कार्दमक वंश के शासकों ने मध्य प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर शासन किया। उज्जैन उनकी राजधानी थी और मालवा क्षेत्र उनके लिए एक रणनीतिक स्थल था।
रुद्रदामन के सैन्य अभियानों ने उन्हें पश्चिमी और मध्य भारत का एक शक्तिशाली शासक बना दिया। उनके शासनकाल की पुष्टि विभिन्न सिक्कों और अभिलेखों से होती है, जो मध्य प्रदेश के प्राचीन इतिहास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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