मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह

मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नमक सत्याग्रह (1930) एक ऐतिहासिक आंदोलन था, जिसका प्रभाव पूरे देश के साथ मध्य प्रदेश में भी व्यापक रूप से देखा गया। महात्मा गांधी द्वारा दांडी मार्च के माध्यम से प्रारंभ किया गया यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण नमक कर के विरुद्ध था।
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मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह की शुरुआत

मध्य प्रदेश में 6 अप्रैल, 1930 को जबलपुर में सेठ गोविंद दास और पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में नमक सत्याग्रह प्रारंभ हुआ। इस आंदोलन में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने भाग लिया और ब्रिटिश सरकार के नमक कानून को तोड़ने का साहसिक कदम उठाया।

सिवनी में नमक सत्याग्रह

सिवनी जिले में श्री दुर्गाशंकर मेहता ने गांधी चौक पर नमक बनाकर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी। उनका यह कदम अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जन जागरूकता और विरोध का प्रतीक बना।

अन्य प्रमुख स्थानों पर सत्याग्रह

जबलपुर और सिवनी के अलावा, खंडवा, सीहोर, रायपुर जैसे नगरों में भी सत्याग्रहियों ने नमक कानून का उल्लंघन किया। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष का प्रतीक बना और पूरे मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
नमक सत्याग्रह ने मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन को एक नया जोश और गति प्रदान की। जबलपुर, सिवनी, खंडवा, सीहोर और रायपुर जैसे स्थानों पर इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस साहसिक अध्याय में मध्य प्रदेश के वीर सपूतों का योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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