मध्य प्रदेश में आधुनिक काल का इतिहास

मध्य प्रदेश में आधुनिक काल का इतिहास

1703 ई. में नीमा सिंधिया ने बरार और मालवा पर आक्रमण किया था, किन्तु वह पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सका।
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1709 ई. में उदाजी पंवार ने कुछ समय के लिए माण्डू को अपने अधीन कर लिया। छत्रपति शाहू जी महाराज ने 1713 ई. में बालाजी विश्वनाथ को पेशवा पद पर नियुक्त किया था।
पेशवा बाजीराव प्रथम ने उदाजी पवार, मल्हार राव होल्कर तथा राणोंजी सिंधिया के साथ 1724 ई. में नर्मदा नदी पार करके आक्रमण किया।
  • उसके पश्चात् 1733 ई. में मल्हारजी होल्कर, राणोजी शिंदे तथा पिलाजी जाधव ने मालवा, नरवर, दतिया तथा ओरछा से लगभग तीन लाख रुपये वसूल किये थे। पिलाजी जाधव की वीरता से प्रसन्न होकर छत्रपति द्वारा उसे 17 नवम्बर, 1734 को पोहरी, हवेली, शिवपुरी तथा नरवर क्षेत्र प्रदान किए गए।
  • 1737 ई. में भोपाल के युद्ध में पेशवा बाजीराव ने हैदराबाद के निजाम को पराजित किया था। युद्ध के बाद दौरासराय की संधि हुई, जिसमें निजाम ने नर्मदा तथा चम्बल नदी के मध्य के सभी क्षेत्रों पर मराठों का आधिपत्य स्वीकार कर लिया था।
वर्ष 1740 को बाजीराव पेशवा ने इंडिया तथा खरगौन पर अधिकार हेतु प्रस्थान किया, किन्तु 28 अप्रैल, 1740 को रावरखेड़ी में ज्वर से पीड़ित होने के कारण इसकी मृत्यु हो गयी। यहीं पर उनकी समाधि निर्मित की गई है।

क्षेत्रीय रियासतें -
2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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