मध्य प्रदेश की न्यायपालिका

मध्य प्रदेश की न्यायपालिका

यह लेख मध्य प्रदेश की न्यायपालिका की संरचना, कार्यप्रणाली और महत्वपूर्ण तथ्यों को विस्तार से प्रस्तुत करता है। इसमें उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, विशेष न्यायालयों तथा अन्य अधीनस्थ न्यायालयों की भूमिका और शक्तियों को समझाया गया है।
इस लेख में भारतीय संविधान के तहत उच्च न्यायालय की स्थापना, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, न्यायाधीशों की संख्या और खंडपीठों की जानकारी दी गई है। साथ ही, जिला न्यायालयों, फास्ट ट्रैक कोर्ट, श्रम न्यायालय, राजस्व न्यायालय और विशेष न्यायालयों की व्यवस्था को भी विस्तार से बताया गया है।
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यदि आप मध्य प्रदेश की न्यायपालिका की संरचना और कार्यप्रणाली को समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।
मध्य प्रदेश की न्यायपालिका भारतीय संविधान के अनुसार संरचित है और इसमें उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, विशेष न्यायालय तथा अन्य अधीनस्थ न्यायालय सम्मिलित हैं।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार, प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय की स्थापना की जाती है। अनुच्छेद 215 के तहत, उच्च न्यायालय को एक अभिलेख न्यायालय का दर्जा प्राप्त है, जिसके निर्णय आधिकारिक होते हैं और अधीनस्थ न्यायालय उन्हीं के आधार पर निर्णय देते हैं। साथ ही, अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों के अधीक्षण की शक्ति प्रदान करता है।

इतिहास एवं स्थापना

मध्य प्रदेश के गठन से पूर्व, इस क्षेत्र का न्यायालय 2 जनवरी 1936 को भारत शासन अधिनियम, 1935 की धारा 108 के अंतर्गत नागपुर में स्थापित किया गया था। वर्ष 1956 में इसे जबलपुर स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में, जबलपुर उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ है, जबकि इसकी दो खंडपीठें 28 नवम्बर 1968 को इंदौर और ग्वालियर में स्थापित की गईं। भोपाल में तीसरी खंडपीठ की स्थापना प्रस्तावित है।

भवन एवं वास्तुकला

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य भवन का निर्माण राजा गोकुलदास ने वर्ष 1889 में करवाया था, और इसके वास्तुकार हेनरी इरविन थे। वर्तमान में, उच्च न्यायालय में कुल 36 न्यायाधीश कार्यरत हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य
  • मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एम. हिदायतुल्ला थे, जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 11वें मुख्य न्यायाधीश भी बने।
  • इस न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश श्रीमती सरोजिनी सक्सेना थीं।
  • वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रवि मलिमथ हैं।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
न्यायाधीश पद ग्रहण पद त्याग
श्री एम. हिदायतुल्ला01/11/195612/12/1958
श्री जी.पी. भट्ट13/12/195822/09/1959
श्री पी.वी. दीक्षित22/09/195918/03/1969
श्री विश्वभर दयाल19/03/196913/03/1972
श्री पी. के. तार14/09/197210/10/1978
श्री शिवदयाल11/10/197828/02/1978
श्री ए. पी. सेन28/02/197814/07/1978
श्री जी.पी. सिंह27/07/197803/01/1984
श्री जी.एल. ओझा01/12/198427/10/1985
श्री जे.एस. वर्मा14/06/198627/08/1986
श्री एन.डी. ओझा08/01/198718/01/1988
श्री जे.जी. सहानी21/10/198823/10/1989
श्री एस.के. झा27/10/198915/12/1993
श्री यू.एल. भट्ट15/12/199310/10/1995
श्री ए.के. माथुर03/02/199621/12/1999
श्री भवानी सिंह24/02/200019/08/2003
श्री कुमार राजारत्नम06/09/200312/03/2004
श्री आर.वी. रविन्द्र08/07/200408/09/2005
श्री ए.के. पट्नायक02/10/200516/11/2009
श्री एस.आर. आलम20/12/200904/08/2011
श्री शरद अरविन्द बोबडे16/10/201211/04/2013
श्री अजय खानविलकर24/11/201312/05/2016
श्री हेमंत गुप्ता14/11/201801/11/2019
श्री संजय कुमार सेठ14/11/201809/06/2019
श्री रविशंकर झा10/06/201903/10/2019
श्री संजय यादव04/10/20193/11/2019
श्री अजय कुमार मित्तल3/11/201929/09/2020
श्री संजय यादव30/09/202012/01/2021
श्री मोहम्मद रफीक03/01/202113/10/2021
श्री रवि मलिमथ14/10/2021वर्तमान तक

जिला न्यायालय एवं अन्य अधीनस्थ न्यायालय

अनुच्छेद 233 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय के अधीनस्थ जिला न्यायालय की स्थापना का प्रावधान किया गया है। अधीनस्थ न्यायालयों से सम्बंधित प्रावधान संविधान के भाग-6 के अध्याय-6, (अनुच्छेद 233-237) में दिए गए हैं।

जिला न्यायालय की भूमिका

जब जिला न्यायाधीश आपराधिक मामलों की सुनवाई करता है, तो उसे सत्र न्यायाधीश (Session Judge) कहा जाता है।
जब वह सिविल मामलों की सुनवाई करता है, तो उसे जिला न्यायाधीश (District Judge) कहा जाता है।
इस कारण उसे जिला एवं सत्र न्यायाधीश भी कहा जाता है।

विशेष न्यायालय एवं अन्य न्यायिक संस्थान

  • विशेष न्यायालय - अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत प्रत्येक जिला न्यायालय में एक विशेष न्यायालय की स्थापना की गई है।
  • राजस्व न्यायालय - राजस्व संबंधी दीवानी मामलों के निपटारे हेतु ग्वालियर में राजस्व मंडल का गठन किया गया। वर्ष 2011 में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 में संशोधन के उपरांत राजस्व निगरानी एवं सुनवाई के समस्त अधिकार प्रदान किये गये।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) - आपराधिक मामलों को त्वरित रूप से निपटाने के लिए 11वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर 1 अप्रैल 2001 को फास्ट ट्रैक न्यायालय की स्थापना की गई।
  • श्रम एवं परिवार न्यायालय - मध्य प्रदेश में औद्योगिक अधिनियम-1960 के अन्तर्गत् 25 श्रम न्यायालय तथा कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम-1935 के अन्तर्गत सभी संभागीय मुख्यालयों में परिवार न्यायालयों की स्थापना की गई है।
मध्य प्रदेश की न्यायपालिका, भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत कार्य करती है। उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, विशेष न्यायालय, राजस्व न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट तथा अन्य अधीनस्थ न्यायालय मिलकर प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। न्यायिक सुधारों और तकनीकी प्रगति के साथ, यह प्रणाली और अधिक प्रभावी होती जा रही है।

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