महाजनपद काल: मध्य प्रदेश के प्रमुख महाजनपद
प्राचीन भारत के इतिहास में महाजनपद काल (छठी शताब्दी ईसा पूर्व) एक महत्वपूर्ण युग था, जिसमें विभिन्न राजनीतिक संरचनाओं का विकास हुआ। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तरनिकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है, जिनमें से दो प्रमुख महाजनपद अवन्ति और चेदि वर्तमान मध्य प्रदेश के क्षेत्र में स्थित थे।
अवन्ति के उज्जयिनी और महिष्मती जैसे प्रसिद्ध नगरों का उल्लेख किया गया है, वहीं चेदि महाजनपद की राजधानी शुक्तिमती और उसके राजनीतिक प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है। यह लेख इन महाजनपदों की ऐतिहासिक विरासत और उनके भारतीय उपमहाद्वीप पर प्रभाव को समझने में सहायक है।
अवन्ति महाजनपद
अवन्ति महाजनपद मालवा के मध्य और पश्चिमी क्षेत्र में स्थित था, जो चंबल और नर्मदा नदियों के बीच फैला हुआ था। इसे दो भागों में विभाजित किया गया था:
- उत्तरी अवन्ति - इसकी राजधानी उज्जयिनी थी, जो आज के उज्जैन के रूप में प्रसिद्ध है।
- दक्षिणी अवन्ति - इसकी राजधानी महिष्मती थी, जो वर्तमान में महेश्वर के रूप में जानी जाती है।
इन दोनों क्षेत्रों के मध्य वेत्रवती (बेतवा) नदी बहती थी। जीवक के लेखों में विदिशा, गोननद (आधुनिक दुराहा), उज्जैन और महिष्मती का उल्लेख मिलता है। बौद्ध और जैन ग्रंथों के अनुसार, अवन्ति के दो अन्य प्रसिद्ध नगर कुररघर और सुदर्शनपुर भी थे।
अवन्ति बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र था। यहाँ के शासक चण्डप्रद्योत सम्राट बुद्ध के समकालीन थे। बौद्धकालीन अभिलेखों में अवन्ति को अच्युतगामी या अच्युतगामिनी नाम से भी जाना जाता था। यह राज्य व्यापार, कला और संस्कृति का केंद्र था और अपने सैन्य शक्ति के लिए भी प्रसिद्ध था।
चेदि महाजनपद
चेदि महाजनपद का विस्तार सोन और नर्मदा घाटियों के मध्य था। परवर्ती काल में यहाँ कलचुरि वंश का शासन स्थापित हुआ, जिसका विस्तार उत्तर में कालिंजर तक था। महाभारत काल में यह महाजनपद अपनी सैन्य शक्ति और राजनीतिक प्रभाव के लिए जाना जाता था।
इसकी राजधानी शुक्तिमती (या शुक्तिसाह्वय) थी, जिसे जातक कथाओं में सोत्थिवती कहा गया है। यह वर्तमान बुंदेलखंड के क्षेत्र में स्थित थी। इस महाजनपद की पश्चिमी सीमा अवन्ति से लगती थी और बेतवा नदी दोनों राज्यों के बीच प्राकृतिक सीमा का कार्य करती थी।
अवन्ति और चेदि महाजनपद न केवल मध्य प्रदेश के प्राचीन इतिहास में महत्वपूर्ण थे, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर भी गहरा प्रभाव डालते थे। इन महाजनपदों ने उस समय के धार्मिक, व्यापारिक और राजनीतिक संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. मध्य प्रदेश का इतिहास
- पुरापाषाण काल
- मध्यपाषाण काल
- नवपाषाण काल
- ताम्रपाषाण काल
- मालवा की ताम्रपाषाण संस्कृति
- ऐतिहासिक काल (लौह युग)
- वैदिक सभ्यता
- पौराणिक कालखण्ड
- महाजनपद काल
- मौर्य काल
- शुंग वंश
- सातवाहन वंश
- हिन्द-यवन
- शक वंश
- कुषाण वंश
- नागवंश
- आभीर वंश
- बोधि और मघ
- वाकाटक वंश
- गुप्त वंश
- औलिकर वंश
- परिव्राजक और उच्चकल्प
- पाण्डु वंश
- परवर्ती गुप्त एवं मौखरि वंश
- कलचुरि राजवंश
- चंदेल
- राष्ट्रकूट
- गुर्जर-प्रतिहार वंश
- मालवा का परमार वंश
- दिल्ली सल्तनत
- मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना
- निमाड़ में फारूकी शासन
- मुगल काल
- गढ़ा का गोंड वंश
- तोमर वंश
- बुंदेला वंश
- बघेलखण्ड राज्य
- मध्य प्रदेश में आधुनिक काल का इतिहास
- होल्कर रियासत
- सिंधिया वंश
- भोपाल रियासत
- भोपाल की बेगमें
- मध्य प्रदेश में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रमुख विद्रोह
- मध्य प्रदेश में 1857 की क्रांति
- राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश की भूमिका
- झण्डा सत्याग्रह
- जंगल सत्याग्रह
- मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह
- चरणपादुका नरसंहार
- पंजाब मेल हत्याकांड
- सोहाबल का नरसंहार
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य गतिविधियाँ
- भोपाल राज्य का स्वतंत्रता संघर्ष
- भोपाल का जलियाँवाला काण्ड
- रीवा का चावल आंदोलन
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