कुषाण वंश (मध्य प्रदेश) इतिहास, शासन और पुरातात्विक प्रमाण

कुषाण वंश (मध्य प्रदेश)

इस लेख में मध्य प्रदेश में कुषाण वंश के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई है। इसमें महान शासक कनिष्क द्वारा शकों को हराने और मालवा पर अधिकार करने की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। शहडोल, विदिशा, झाझापुरी, हरदा और जबलपुर से प्राप्त कुषाणकालीन सिक्कों और अभिलेखों के आधार पर इस वंश की उपस्थिति के प्रमाण दिए गए हैं। साथ ही, साँची अभिलेख, भेड़ाघाट की मूर्तियाँ और बौद्ध प्रतिमाओं के माध्यम से कुषाण काल की सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाया गया है। यह लेख कुषाणों के प्रशासनिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को स्पष्ट करता है।
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कुषाण वंश का भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है, विशेषकर मध्य प्रदेश में इस वंश की उपस्थिति के कई प्रमाण मिलते हैं। कुषाण शासकों ने इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाया और शासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण अवशेष यहां पाए गए हैं।

कनिष्क और मध्य प्रदेश  

महान कुषाण शासक कनिष्क (78-105 ई.) ने उज्जैन के पश्चिमी क्षत्रपों (शकों) को युद्ध में हराया और मालवा के कुछ हिस्सों पर अधिकार कर लिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि कुषाण वंश ने मालवा क्षेत्र में अपनी सत्ता स्थापित की थी।

सिक्कों से प्रमाण  

मध्य प्रदेश में कुषाण वंश के शासन का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण यहां से प्राप्त सिक्के हैं:  
  • शहडोल से मिले 757 कुषाणकालीन सिक्कों में से 324 कनिष्क प्रथम के हैं।  
  • विदिशा से विम कडफिसेस का एक सिक्का मिला है, जो बताता है कि इस क्षेत्र में उसका प्रभाव था।  
  • झाझापुरी, शहडोल और हरदा से भी कनिष्क के सिक्के प्राप्त हुए हैं।  
  • जबलपुर (तेवर) से वासुदेव प्रथम का तांबे का सिक्का मिला है, लेकिन उसके उत्तराधिकारी के शासन का कोई प्रमाण मध्य प्रदेश में नहीं मिलता।  

कुषाणकालीन अभिलेख और मूर्तियाँ

मध्य प्रदेश में कुषाण वंश के शासन को प्रमाणित करने वाले कई अभिलेख और मूर्तियाँ भी प्राप्त हुई हैं:
  • साँची अभिलेख  यह कनिष्क के शासन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अभिलेख है।
  • भेड़ाघाट (जबलपुर) से दो मूर्तिलेख  ये कुषाण कालीन बौद्ध संस्कृति और कला के प्रतीक हैं।
  • बौद्ध प्रतिमाएँ  यह दर्शाती हैं कि कुषाण काल में बौद्ध धर्म का प्रभाव इस क्षेत्र में काफी मजबूत था।
मध्य प्रदेश में कुषाण वंश का प्रभाव सिक्कों, अभिलेखों और मूर्तियों के रूप में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। कनिष्क के विजय अभियानों से मालवा क्षेत्र में कुषाण शासन की पुष्टि होती है, जबकि विभिन्न स्थलों से मिले सिक्के इस वंश के व्यापार और प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाते हैं।
साँची और भेड़ाघाट में मिले अभिलेख कुषाणों के धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव का प्रमाण हैं। कुल मिलाकर, कुषाण वंश का मध्य प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान था, जो आज भी पुरातात्विक खोजों के माध्यम से प्रमाणित होता है।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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