होल्कर रियासत (मध्य प्रदेश)
इस लेख में होल्कर रियासत के उदय, शासन और विलय की विस्तृत जानकारी दी गई है। यह 1732 ई. में पेशवा बाजीराव द्वारा मराठा सरदारों होल्कर, सिंधिया और पवार के मध्य किए गए अधिकार विभाजन से लेकर तुकोजीराव तृतीय के शासनकाल में राज्य के विलय तक की ऐतिहासिक घटनाओं को दर्शाता है। साथ ही, अहिल्याबाई होल्कर के सुशासन और उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला गया है। यह लेख मध्य प्रदेश के इतिहास में होल्कर वंश की भूमिका को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करता है।
होल्कर रियासत मध्य प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली मराठा शक्ति थी। इसका उत्थान 18वीं शताब्दी में हुआ, जब पेशवा बाजीराव ने 1732 ई. में एक औपचारिक संधि द्वारा मराठा सरदारों होल्कर, सिंधिया और पवार के अधिकार क्षेत्रों का विभाजन किया। इस संधि के तहत, मालवा प्रदेश के इंदौर, देवालपुर और बेटमा सहित लगभग 28 परगने होल्कर के अधीन आए। यह संधि मराठा राज्यों की नींव रखने का आधार बनी, जिसमें:
- होल्कर (इंदौर)
- सिंधिया (ग्वालियर)
- आनंदराव पवार (धार)
- तुकोजी (देवास बड़ी पाती)
- जीवाजी (देवास छोटी पाती)
शामिल थे।
होल्कर वंश का विस्तार और शासन
पानीपत के तृतीय युद्ध (14 जनवरी, 1761) के बाद मल्हारराव होल्कर ने इंदौर पर अधिकार कर लिया। लेकिन 26 मई, 1766 को आलमपुर में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई, जिनकी समाधि भिंड जिले में स्थित है। इसके पश्चात, उनके पौत्र मालेराव होल्कर के नाम पर अहिल्याबाई होल्कर ने पेशवा की अनुमति से प्रशासन की बागडोर संभाली। उन्होंने मल्हारराव के विश्वस्त अधिकारी तुकोजी होल्कर को सेना का सेनापति नियुक्त किया।
अहिल्याबाई होल्कर का शासनकाल शांति, न्याय और सुशासन के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में इंदौर एक संपन्न राज्य बना। 13 अगस्त, 1795 को 70 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद शासन की बागडोर तुकोजीराव होल्कर के हाथों में आई, लेकिन 15 अगस्त, 1797 को उनका भी निधन हो गया।
होल्कर वंश का अंत और विलय
इसके बाद, होल्कर वंश के कई शासकों ने सत्ता संभाली, जिनमें प्रमुख थे:
- काशीराव होल्कर
- यशवंतराव प्रथम
- तुलसाबाई (मल्हारराव होल्कर के नाम पर)
अंततः, तुकोजीराव तृतीय के शासनकाल में होल्कर राज्य का विलय मध्य भारत में हो गया। इस तरह, होल्कर रियासत मराठा शासन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरी और बाद में ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गई।
होल्कर वंश ने न केवल इंदौर बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र में प्रशासन, सैन्य रणनीति और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया। अहिल्याबाई होल्कर का शासन महिलाओं के सशक्तिकरण और धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाना जाता है। उनका योगदान आज भी मध्य प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बना हुआ है।
2. मध्य प्रदेश का इतिहास
- पुरापाषाण काल
- मध्यपाषाण काल
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- ताम्रपाषाण काल
- मालवा की ताम्रपाषाण संस्कृति
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- बुंदेला वंश
- बघेलखण्ड राज्य
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