भोपाल की बेगमें
भोपाल की बेगमों ने न केवल प्रशासनिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक और स्थापत्य कला के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया। इस लेख में कुदसिया बेगम, सिकंदर जहाँ बेगम, शाहजहाँ बेगम, सुल्तान जहाँ बेगम और साजिदा सुल्तान के शासनकाल, उनके निर्माण कार्यों और ऐतिहासिक धरोहरों पर प्रकाश डाला गया है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का इतिहास कई महत्वपूर्ण शासकों से जुड़ा है, जिनमें विशेष रूप से भोपाल की बेगमें उल्लेखनीय हैं। इन महिला शासिकाओं ने न केवल शासन किया बल्कि कई महत्वपूर्ण इमारतों का निर्माण करवाकर भोपाल को एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित किया।
1. कुदसिया बेगम / गौहर बेगम (1819-1837 ई.)
भोपाल की प्रथम महिला शासिका कुदसिया बेगम, जिन्हें गौहर बेगम के नाम से भी जाना जाता था, ने शासन की बागडोर तब संभाली जब उनके पति की असमय मृत्यु हो गई।
उपलब्धियां:
- इन्होंने जामा मस्जिद और गौहर महल जैसी प्रसिद्ध इमारतों का निर्माण करवाया।
- महिला नेतृत्व को सशक्त बनाते हुए भोपाल की शासन व्यवस्था को मजबूती दी।
2. सिकंदर जहाँ बेगम (1844-1868 ई.)
कुदसिया बेगम के बाद उनकी बेटी सिकंदर जहाँ बेगम ने सत्ता संभाली और प्रशासन में कई सुधार किए।
महत्वपूर्ण कार्य:
- 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों का समर्थन किया।
- मोती मस्जिद और मोती महल जैसी प्रतिष्ठित इमारतों का निर्माण करवाया।
- सैन्य सुधारों में योगदान दिया।
3. शाहजहाँ बेगम (1868-1901 ई.)
सिकंदर जहाँ बेगम की उत्तराधिकारी शाहजहाँ बेगम ने भोपाल को वास्तुकला और नगरीय विकास की दृष्टि से समृद्ध किया।
प्रमुख योगदान:
- शाहजहाँनाबाद नामक एक नए उपनगर की स्थापना की।
- लालकोठी (वर्तमान राजभवन) का निर्माण करवाया।
- कला और शिक्षा को बढ़ावा दिया।
4. के. खुसरो जहाँ बेगम (सुल्तान जहाँ बेगम) (1901-1926 ई.)
भोपाल की अंतिम प्रभावशाली महिला शासिका सुल्तान जहाँ बेगम ने शिक्षा और प्रशासन में नए मानक स्थापित किए।
महत्वपूर्ण उपलब्धियां:
- इनका महल शौकत महल कहलाया, जो वर्तमान में भोपाल नगर निगम का कार्यालय है।
- नूर उस सबा नामक एक भव्य महल बनवाया, जिसे अब हेरिटेज होटल में परिवर्तित कर दिया गया है।
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की प्रथम चांसलर बनीं।
5. बेगम साजिदा सुल्तान (1961-1995 ई.)
साजिदा सुल्तान, भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान की बेटी थीं।
मुख्य घटनाएं:
- उनकी बहन बेगम आबिदा सुल्तान विभाजन के बाद पाकिस्तान चली गईं, जिससे साजिदा सुल्तान भोपाल की नवाब बनीं।
- इनका विवाह पटौदी के नवाब इफ्तिखार अली खान से हुआ था, जिससे उनके पुत्र मंसूर अली खान पटौदी को नवाब पटौदी के रूप में जाना गया।
भोपाल की बेगमों ने शासन में उल्लेखनीय योगदान देकर प्रशासन, कला, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके द्वारा निर्मित भवन आज भी उनकी विरासत की झलक दिखाते हैं।
इन महिला शासकों ने न केवल भोपाल को एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित किया, बल्कि भारतीय इतिहास में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
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