भोपाल का जलियाँवाला काण्ड
भोपाल का जलियाँवाला काण्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह घटना 14 जनवरी, 1949 को मकर संक्रांति के दिन रायसेन जिले के बोरास गाँव में नर्मदा नदी के तट पर घटित हुई थी। इस दिन स्वतंत्रता सेनानियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा तिरंगा फहराने का प्रयास किया गया, जिससे भोपाल रियासत की नवाबी सेना के साथ संघर्ष हो गया।
इस संघर्ष में नवाब की सेना के अधिकारी जाफर अली खाँ ने निर्दोष नागरिकों पर गोलियाँ चलवाईं, जिसमें बैजनाथ गुप्ता, छोटे लाल, वीरधन सिंह, मंगल सिंह और विशाल सिंह की मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस निर्मम हत्याकांड को इतिहास में "भोपाल का जलियाँवाला काण्ड" के नाम से जाना जाता है।
यह घटना स्वतंत्रता के बाद भी देश में राजशाही के दमनचक्र को उजागर करती है। यह काण्ड भोपाल रियासत के भारत में विलय के संघर्ष का प्रतीक बना और इसने रियासतों के एकीकरण के आंदोलन को और अधिक बल प्रदान किया।
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