आभीर वंश : मध्य प्रदेश में प्रभाव और शासन
इस लेख में आपको आभीर वंश के उदय, शासन और उनके प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी। आभीरों ने सातवाहनों के अधीन रहते हुए खानदेश (वर्तमान बुरहानपुर) में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। 250 ई. के नासिक शिलालेख के अनुसार, आभीर साम्राज्य के संस्थापक ईश्वर सेन थे।
इस लेख में आप जानेंगे कि आभीरों ने अनूप प्रदेश (निमाड़) और मालवा को कैसे अपने अधिपत्य में लिया और उनके पतन के बाद इन प्रदेशों के आभीर सामंतों ने वाकाटकों की अधीनता क्यों स्वीकार कर ली। यदि आप मध्य प्रदेश के प्राचीन इतिहास और आभीर वंश की भूमिका को समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी रहेगा।
आभीरों ने प्राचीन भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विशेष रूप से सातवाहनों के अधीन रहते हुए, उन्होंने खानदेश (वर्तमान बुरहानपुर) में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की।
ईश्वर सेन आभीर साम्राज्य का संस्थापक
250 ई. के नासिक शिलालेख के अनुसार, आभीर साम्राज्य का संस्थापक ईश्वर सेन था। उनके नेतृत्व में आभीर वंश ने अनूप प्रदेश (वर्तमान निमाड़) और मालवा क्षेत्र को अपने अधिपत्य में ले लिया था। यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भूगोल का एक महत्वपूर्ण भाग रहा है।
आभीर साम्राज्य का विस्तार और पतन
ईश्वर सेन और उनके उत्तराधिकारियों ने मध्य भारत के विभिन्न हिस्सों पर शासन किया, लेकिन कालांतर में आभीर साम्राज्य का पतन हो गया। इसके पश्चात्, इन प्रदेशों में मौजूद आभीर सामंतों ने वाकाटकों की अधीनता स्वीकार कर ली, जिससे इस वंश की स्वतंत्रता समाप्त हो गई।
मध्य प्रदेश में आभीर वंश की विरासत
आभीर वंश का प्रभाव मध्य प्रदेश में लंबे समय तक देखा गया। निमाड़ और मालवा जैसे क्षेत्र उनके प्रभाव में रहे और उन्होंने इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्रशासनिक संरचना को प्रभावित किया।
आभीर वंश ने मध्य प्रदेश के निमाड़ और मालवा क्षेत्र में अपने शासन की मजबूत नींव रखी थी। ईश्वर सेन के नेतृत्व में इस वंश ने अपनी पहचान बनाई, लेकिन कालांतर में वाकाटकों के अधीनता स्वीकार कर ली। भारतीय इतिहास में आभीरों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है, विशेष रूप से मध्य प्रदेश के संदर्भ में।
2. मध्य प्रदेश का इतिहास
- पुरापाषाण काल
- मध्यपाषाण काल
- नवपाषाण काल
- ताम्रपाषाण काल
- मालवा की ताम्रपाषाण संस्कृति
- ऐतिहासिक काल (लौह युग)
- वैदिक सभ्यता
- पौराणिक कालखण्ड
- महाजनपद काल
- मौर्य काल
- शुंग वंश
- सातवाहन वंश
- हिन्द-यवन
- शक वंश
- कुषाण वंश
- नागवंश
- आभीर वंश
- बोधि और मघ
- वाकाटक वंश
- गुप्त वंश
- औलिकर वंश
- परिव्राजक और उच्चकल्प
- पाण्डु वंश
- परवर्ती गुप्त एवं मौखरि वंश
- कलचुरि राजवंश
- चंदेल
- राष्ट्रकूट
- गुर्जर-प्रतिहार वंश
- मालवा का परमार वंश
- दिल्ली सल्तनत
- मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना
- निमाड़ में फारूकी शासन
- मुगल काल
- गढ़ा का गोंड वंश
- तोमर वंश
- बुंदेला वंश
- बघेलखण्ड राज्य
- मध्य प्रदेश में आधुनिक काल का इतिहास
- होल्कर रियासत
- सिंधिया वंश
- भोपाल रियासत
- भोपाल की बेगमें
- मध्य प्रदेश में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रमुख विद्रोह
- मध्य प्रदेश में 1857 की क्रांति
- राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश की भूमिका
- झण्डा सत्याग्रह
- जंगल सत्याग्रह
- मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह
- चरणपादुका नरसंहार
- पंजाब मेल हत्याकांड
- सोहाबल का नरसंहार
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य गतिविधियाँ
- भोपाल राज्य का स्वतंत्रता संघर्ष
- भोपाल का जलियाँवाला काण्ड
- रीवा का चावल आंदोलन
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