मध्य प्रदेश में लौह युग
मध्य प्रदेश का इतिहास अत्यंत समृद्ध और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। विशेष रूप से लौह युग (Iron Age) की संस्कृति के प्रमाण इस क्षेत्र में व्यापक रूप से पाए गए हैं।
यह युग लगभग 1000 ईसा पूर्व का माना जाता है, जब मानव सभ्यता ने लोहे का उपयोग प्रारंभ किया और कृषि, हथियार निर्माण, तथा स्थायी बस्तियों की स्थापना में उन्नति हुई।
मध्य प्रदेश में लौह युग के पुरातात्विक साक्ष्य
मध्य प्रदेश में लौह युग के प्रमाण मालवा क्षेत्र, भिंड, मुरैना और ग्वालियर से मिले हैं। इन स्थलों से धूसर चित्रित मृदभांड (Painted Grey Ware - PGW) के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो इस काल की उन्नत कुम्हार कला और सामाजिक संरचना को दर्शाते हैं।
धूसर चित्रित मृदभांड भारतीय उपमहाद्वीप में लौह युग की एक महत्वपूर्ण पहचान है। ये मृदभांड प्रायः ठोस और मजबूत होते थे, जिन पर भूरे या काले रंग की चित्रकारी होती थी। इनका उपयोग भोजन, जल भंडारण और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था।
मध्य प्रदेश में लौह युग से जुड़े प्रमुख पुरातत्वविद्
मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए पुरातात्विक सर्वेक्षणों में कई प्रतिष्ठित विद्वानों और पुरातत्वविदों ने योगदान दिया।
क्षेत्र | प्रमुख पुरातत्वविद् |
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नर्मदा घाटी सर्वेक्षण | मेकक्राउन, सुपेकर, आर. बी. जोशी, डॉ. एच.डी. सांकलिया, ए.पी. खत्री, सुब्बाराव, पीटरसन |
सोनघाटी सर्वेक्षण | निसार अहमद |
रीवा-सतना क्षेत्र | जी. आर. शर्मा |
चंबल घाटी सर्वेक्षण | ए. पी. खत्री, एस. के. श्रीवास्तव, प्रो. वाकणकर |
ग्वालियर क्षेत्र | बी.बी. लाल |
इन विद्वानों ने मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खुदाई करके प्राचीन सभ्यताओं, बस्तियों और औजारों के साक्ष्य खोजे हैं।
मध्य प्रदेश में लौह युग की विशेषताएँ
- प्रारंभिक नगरीकरण - इस काल में मानव स्थायी बस्तियों में बसने लगा, जिससे नगरों का विकास हुआ।
- धातु तकनीक का विकास - इस युग में लोहे का व्यापक उपयोग देखा गया, जिससे कृषि उपकरण और हथियार बनाए गए।
- मृदभांड और चित्रकला - धूसर चित्रित मृदभांड और अन्य कलाकृतियों का निर्माण हुआ।
- खानाबदोश जीवन से स्थायी समाज की ओर - इस काल में लोगों ने स्थायी आवास बनाना प्रारंभ किया और कृषि पर अधिक निर्भर हो गए।
- धार्मिक अनुष्ठान - इस युग में धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों का विकास हुआ, जिससे बाद में वैदिक परंपराओं को बल मिला।
मध्य प्रदेश में लौह युगीन संस्कृति के साक्ष्य हमें इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और मानव सभ्यता के विकास को समझने में मदद करते हैं। विभिन्न पुरातत्वविदों के शोध से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र प्रारंभिक भारतीय सभ्यता के विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। धूसर चित्रित मृदभांड, लोहे के औजारों और प्राचीन बस्तियों के प्रमाण हमें लौह युग की समृद्ध विरासत से जोड़ते हैं, जो आज भी ऐतिहासिक अनुसंधान और अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
2. मध्य प्रदेश का इतिहास
- पुरापाषाण काल
- मध्यपाषाण काल
- नवपाषाण काल
- ताम्रपाषाण काल
- मालवा की ताम्रपाषाण संस्कृति
- ऐतिहासिक काल (लौह युग)
- वैदिक सभ्यता
- पौराणिक कालखण्ड
- महाजनपद काल
- मौर्य काल
- शुंग वंश
- सातवाहन वंश
- हिन्द-यवन
- शक वंश
- कुषाण वंश
- नागवंश
- आभीर वंश
- बोधि और मघ
- वाकाटक वंश
- गुप्त वंश
- औलिकर वंश
- परिव्राजक और उच्चकल्प
- पाण्डु वंश
- परवर्ती गुप्त एवं मौखरि वंश
- कलचुरि राजवंश
- चंदेल
- राष्ट्रकूट
- गुर्जर-प्रतिहार वंश
- मालवा का परमार वंश
- दिल्ली सल्तनत
- मालवा में स्वतंत्र मुस्लिम सल्तनत की स्थापना
- निमाड़ में फारूकी शासन
- मुगल काल
- गढ़ा का गोंड वंश
- तोमर वंश
- बुंदेला वंश
- बघेलखण्ड राज्य
- मध्य प्रदेश में आधुनिक काल का इतिहास
- होल्कर रियासत
- सिंधिया वंश
- भोपाल रियासत
- भोपाल की बेगमें
- मध्य प्रदेश में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रमुख विद्रोह
- मध्य प्रदेश में 1857 की क्रांति
- राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश की भूमिका
- झण्डा सत्याग्रह
- जंगल सत्याग्रह
- मध्य प्रदेश में नमक सत्याग्रह
- चरणपादुका नरसंहार
- पंजाब मेल हत्याकांड
- सोहाबल का नरसंहार
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य गतिविधियाँ
- भोपाल राज्य का स्वतंत्रता संघर्ष
- भोपाल का जलियाँवाला काण्ड
- रीवा का चावल आंदोलन
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