मध्य प्रदेश में यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल
मध्य प्रदेश भारत का हृदय स्थल है, जो अपने समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनमें से तीन को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह स्थल न केवल भारत के गौरवशाली अतीत की झलक दिखाते हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं।
इस लेख में, हम मध्य प्रदेश में स्थित भीमबेटका की गुफाएँ, साँची स्तूप और खजुराहो के मंदिरों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
1. भीमबेटका की गुफाएँ - मानव सभ्यता की प्राचीनतम झलक
भीमबेटका कहाँ स्थित है?
भीमबेटका की गुफाएँ मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित हैं, जो राजधानी भोपाल से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर हैं। यह स्थल विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है और घने जंगलों से घिरा हुआ है।
भीमबेटका की खोज
भीमबेटका गुफाओं की खोज वर्ष 1957-58 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा की गई थी।
यूनेस्को द्वारा मान्यता
वर्ष 2003 में यूनेस्को ने भीमबेटका को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी।
भीमबेटका का महत्व
- यह स्थल आदिमानव द्वारा बनाए गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है।
- यहाँ 500 से अधिक गुफाएँ हैं, जिनमें से 15 गुफाएँ दर्शकों के लिए खुली हैं।
- इन गुफाओं में लगभग 30,000 साल पुराने शैलचित्र पाए गए हैं, जो आदिमानव के जीवन, शिकार, नृत्य और धार्मिक अनुष्ठानों को दर्शाते हैं।
- यहाँ की चित्रकला विभिन्न कालों से संबंधित है, जिनमें पाषाण युग से लेकर मध्यकाल तक की झलक मिलती है।
- भीमबेटका का नाम महाभारत के पात्र भीम से जुड़ा हुआ है।
2. साँची स्तूप - बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल
साँची कहाँ स्थित है?
साँची स्तूप मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है, जो भोपाल से लगभग 46 किलोमीटर की दूरी पर है।
साँची स्तूप का निर्माण
- साँची स्तूप का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक ने करवाया था।
- यह स्थल बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
- स्तूप का निर्माण ईंटों और पत्थरों से किया गया है, जिसका आकार अर्द्धगोलाकार है।
साँची स्तूप की खोज
1818 ईस्वी में ब्रिटिश अधिकारी जनरल टेलर ने इस स्तूप की खोज की थी।
यूनेस्को द्वारा मान्यता
साँची स्तूप को 1989 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
साँची स्तूप का महत्व
- यह स्थल बौद्ध धर्म के इतिहास और कला का अद्भुत उदाहरण है।
- साँची स्तूप के मुख्य द्वारों (तोरण द्वारों) पर बुद्ध के जीवन से जुड़ी घटनाओं को उकेरा गया है।
- यह स्थान बौद्ध भिक्षुओं के लिए ध्यान और शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।
- साँची स्तूप को देखने हर साल हजारों पर्यटक और श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
3. खजुराहो के मंदिर - भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण
खजुराहो कहाँ स्थित है?
खजुराहो के मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित हैं।
खजुराहो मंदिरों का निर्माण
- इन भव्य मंदिरों का निर्माण 10वीं और 11वीं शताब्दी के मध्य चंदेल वंश के राजाओं द्वारा करवाया गया था।
- खजुराहो मंदिरों का निर्माण नागर शैली में किया गया है।
यूनेस्को द्वारा मान्यता
वर्ष 1986 में खजुराहो के मंदिरों को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
खजुराहो मंदिरों का महत्व
- यहाँ 85 से अधिक मंदिरों का निर्माण किया गया था, जिनमें से अब लगभग 25 मंदिर ही शेष हैं।
- ये मंदिर हिंदू और जैन धर्म से संबंधित हैं।
- खजुराहो के मंदिर अपनी दुर्लभ मूर्तिकला, शिल्पकला और भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं।
- इन मंदिरों की दीवारों पर की गई नक्काशी में कामकला, दैनिक जीवन, देवी-देवताओं, युद्ध, संगीत और नृत्य से संबंधित चित्र उकेरे गए हैं।
- प्रमुख मंदिरों में कंदारिया महादेव मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, विष्णु मंदिर, जगदंबी मंदिर आदि शामिल हैं।
इन विश्व धरोहर स्थलों का पर्यटन में महत्व
- मध्य प्रदेश में स्थित ये तीनों विश्व धरोहर स्थल न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा देते हैं।
- हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक इन स्थलों को देखने आते हैं।
- यह स्थल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- मध्य प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग इन स्थलों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए विशेष योजनाएँ चला रहे हैं।
मध्य प्रदेश में स्थित भीमबेटका की गुफाएँ, साँची स्तूप और खजुराहो के मंदिर भारतीय इतिहास और संस्कृति की अद्भुत धरोहर हैं। इन स्थलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता मिलना, उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को और अधिक प्रमाणित करता है। ये स्थल न केवल भारत के गौरवशाली अतीत को दर्शाते हैं, बल्कि आज भी पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।यदि आप भारत की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश के इन विश्व धरोहर स्थलों की यात्रा जरूर करें!
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