मध्यपाषाण काल (मध्य प्रदेश) : इतिहास, स्थल और पुरातात्विक साक्ष्य

मध्यपाषाण काल (Mesolithic Period)

मध्यपाषाण काल, जिसे Mesolithic Period भी कहा जाता है, मानव सभ्यता के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण था। इस काल में मानव जीवन में कई परिवर्तन हुए, जिसमें शिकार, पशुपालन और कृषि की प्रारंभिक झलक देखने को मिलती है।
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मध्य प्रदेश में इस युग के कई महत्त्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं, जो इस क्षेत्र में उस समय की मानव सभ्यता की झलक प्रस्तुत करते हैं।

आदमगढ़ शैलाश्रय - मध्यपाषाण काल का प्रमुख केंद्र

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित आदमगढ़ शैलाश्रय मध्यपाषाण काल के प्रमुख स्थलों में से एक है। यहाँ से प्रसिद्ध पुरातत्वविद् आर. बी. जोशी ने लगभग 25,000 लघुपाषाण उपकरण प्राप्त किए थे। ये उपकरण उस समय के मानव के दैनिक जीवन, शिकार, एवं अस्त्र-शस्त्र निर्माण की तकनीकों को दर्शाते हैं।

मानव के पशुपालक होने का प्रमाण

आदमगढ़ से प्राप्त अवशेषों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि इस काल में मानव पशुपालन करने लगा था। यह कृषि और स्थायी जीवनशैली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम था। इसके अलावा, एक अन्य महत्वपूर्ण खोज यह हुई कि यहाँ मानव शव के साथ कुत्ते के दफनाए जाने के प्रमाण भी मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि उस समय मानव और पशु के बीच घनिष्ठ संबंध था।

विंध्य क्षेत्र में मध्यपाषाण काल की खोज

पुरातत्वविद् सी. एल. कार्लाइल ने वर्ष 1867 में विंध्य क्षेत्र में मध्यपाषाण काल के लघु पाषाण उपकरणों की खोज की थी। इन उपकरणों का उपयोग शिकार और दैनिक जीवन की अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता था। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में मानव का निवास इस काल में भी था।

बाघ गुफाएँ - एक अन्य महत्वपूर्ण स्थल
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित प्रसिद्ध बाघ गुफाएँ भी इस काल के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में से एक हैं। ये गुफाएँ बाघिन नदी के तट पर स्थित हैं और यहाँ से मध्यपाषाण काल से लेकर नवपाषाण काल तक के उपकरणों की खोज की गई है। इससे यह प्रमाणित होता है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता का विस्तार कई युगों तक होता रहा था।
मध्यपाषाण काल मानव सभ्यता के विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसमें शिकार और भोजन संग्रहण के साथ-साथ पशुपालन और प्रारंभिक कृषि का विकास हुआ। मध्य प्रदेश के आदमगढ़ शैलाश्रय, विंध्य क्षेत्र और बाघ गुफाओं से प्राप्त पुरातात्विक अवशेष इस बात का प्रमाण हैं कि इस क्षेत्र में उस समय मानव गतिविधियाँ व्यापक रूप से फैली हुई थीं। इन खोजों से हमें इस युग की जीवनशैली, तकनीकों और सामाजिक संरचना को समझने में मदद मिलती है।

2. मध्य प्रदेश का इतिहास

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